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Wednesday, December 2, 2015

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“गरीबी आदमियों के कपडे उतार लेती है
और अमीरी औरतों के ……!!!

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नमक स्वाद अनुसार।
अकड औकात अनुसार।

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लगी है मेहंदी पावँ में क्या घूमोगे गावं मे…
असर धूप का क्या जाने जो रहते है छावं मे…!!

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बहुत आसान है पहचान इसकी
अगर दुखता नहीं तो दिल नहीं है

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“गम की परछाईयाँ यार की रुसवाईयाँ,
वाह रे मुहोब्बत ! तेरे ही दर्द और तेरी ही दवाईयां ”

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चुपके से धड़कन में उतर जायेंगे,
राहें उल्फत में हद से गुजर जायेंगे,
आप जो हमें इतना चाहेंगे…..,
हम तो आपकी साँसों में पिघल जायेंगे.

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हम आते हैं महफ़िल में तो फ़कत एक वजह से,
यारों को रहे ख़बर कि अभी हम हैं वजूद में..”

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“तुझे मुफ्त में जो मिल गए हम,
तू कदर ना करे ये तेरा हक़ बनता है”..!!!!!

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सुना है काफी पढ़ लिख गए हो तुम….
कभी वो भी तो पढ़ो जो हम कह नहीं पाते…!

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वजह पूछ मत तू मेरे रोने कि
तेरी मुस्कराहट पे ख़ुशी के दो आंसू गिर गए.

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काश ! वो सुबह नींद से जागे तो मुझसे लड़ने आए, कि तुम होते कौन हो मेरे ख़्वाबों में आने वाले

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वो मेरी किस्मत में नहीं,
ये सुना है लोगों से,
फिर सोचता हूँ,
किस्मत खुदा लिखता है लोग नहीं…….

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तेरी आवाज़ से प्यार है हमें
इतना इज़हार हम कर नहीं सकते .
हमारे लिए तू उस खुदा की तरह है
जिसका दीदार हम कर नहीं सकते…..।

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हमें आदत नहीं हर एक पे मर मिटने की…
तुझे में बात ही कुछ ऐसी थी दिल ने सोचने की मोहलत ना दी..

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कुछ ऐसा अंदाज था उनकी हर अदा में,
के तस्वीर भी देखूँ उनकी तो खुशी तैर
जाती है चेहरे पे !!!!

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“पत्थरों से प्यार किया नादान थे हम,
गलती हुई क्योकि इंशान थे हम….,
आज जिन्हें नज़रें मिलाने में तकलीफ होती हैं,
कभी उसी सक्स की जान थे हम…..”

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वजह खुबसुरत हो ये ज़रूरी नही ।
पर जो हाथो की लकीरो मे न हो ,
उसी को अपनी किस्मत बनाने की ज़िद होनी चाहिये ।

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मेरे लफ्जों की पहचान अगर वो कर लेती..
उसे मुझसे नहीं खुद से मुहब्बत हो जाती..!!

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हम ने मोहब्बत के नशे में आ कर उसे खुदा बना डाला;
होश तब आया जब उस ने कहा कि खुदा किसी एक का नहीं होता।

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आदमी कभी भी इतना झूठा नहीं होता …..!!!
अगर औरतें इतने सवाल न करती…!!

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लकीरें भी बड़ी अजीब होती हैं——
माथे पर खिंच जाएँ तो किस्मत बना देती हैं
जमीन पर खिंच जाएँ तो सरहदें बना देती हैं
खाल पर खिंच जाएँ तो खून ही निकाल देती हैं
और रिश्तों पर खिंच जाएँ तो दीवार बना देती हैं..

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खुशीयां तो कब से रूठ गई हैं मुझसे,
काश इन गमों को भी कीसी की नजर लग जाये ।

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चिराग से न पूछो बाकि तेल कितना है
सांसो से न पूछो बाकि खेल कितना है
पूछो उस कफ़न में लिपटे मुर्दे से
जिन्दगी में गम और कफ़न में चैन कितना है

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हम ना पा सके तुझे मुदतो के चाहने के बाद ,
ओर किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमे निभाने के बाद !!

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उन से कह दो अपनी ख़ास हिफाज़त किया करे .. बेशक साँसे उनकी है … पर जान तो मेरी है …!!

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उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पे रौनक;
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।

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गुमान न कर अपनी खुश-नसीबी का
खुदा ने गर चाहा तो तुझे भी इश्क होगा

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याद हँ मुझे मेरे सारे गुनाह,
एक मोहब्बत करली,
दूसरा तुमसे कर ली,
तीसरा बेपनह कर ली।
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ज़िन्दा है तो बस तेरी ही इश्क की रहेमत पर
मर गए हम तो समझना तेरा प्यार कम पड़ा रहा था।।
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“शब्द पहचान बनें मेरी तो बेहतर है,
चेहरे का क्या है,
वो मेरे साथ ही चला जाएगा एक दिन”…..

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उसने पुछा जिंदगी किसने बरबाद की ।
हमने ऊँगली उठाई और अपने ही दिल पर रख ली ।।।

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बक्श देता है खुदा उनको, जिनकी किस्मत खराब होती है…..
वो हरगिज़ नहीं बक्शे जाएंगे जिनकी नियत खराब होती है …..

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सारी दुनिया की खुशी अपनी जगह …. ..
उन सबके बीच
तेरी कमी अपनी जगह …..!

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दर्द की दीवार पर फरियाद लिखा करते हैं
हर रात तन्हाई को आबाद किया करते है

ए खुदा उन्हे हमेशा खुश रखना जिन्हे
हम तुमसे भी पहले याद किया करते है
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लोग पूछते है ये कविताएँ कैसे बनी ?
मैं कहता हूँ :
कुछ आँसू कागज़ पर गिरे और छप गए….

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लोग देखेंगे तो अफ़साना बना डालेंगे ………..!
यूँ मेरे दिल में चले आओ की आहट भी न हो .!!!

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ज़मीन के उपर मोहब्बत से रहना सीख लो
वर्ना ज़मीन के नीचे सुकून से ना रह पाओगे।

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मुद्दत से उस की छाँव में बैठा नहीं कोई
वो सायादार पेड़ इसी ग़म में मर गया


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गुज़रते लम्हों में सदिया तलाश करता हूँ,
ये मेरी प्यास है नदिया तलाश करता हूँ.

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